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Friday, February 4, 2011

मिस्टर इंडिया जैसे हो सकेंगे गायब!


चौंकिए मत यह सौ फीसदी सच है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा आवरण तैयार करने में सफलता पाई है जिससे किसीभी चीज को अदृश्य किया जा सकेगा
लंदन। अब वह दिन दूर नहीं जब आप फिल्म मि. इंडिया के अनिल कपूर की तरह जब चाहे गायब हो सकेंगे। चौंकिए मत। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा आवरण तैयार करने में सफलता पाई है जिसे पहन कर कोई भी चीज तेज रोशनी पड़ते ही अदृश्य हो सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक कैल्शियम कार्बोनेट क्रिसटल द्वारा तैयार किए गए इस विशेष आवरण से ढकी वस्तुओं को लोगों की नजरों से पलक झपकते ही छुपाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह अदृश्य आवरण एक तरह से कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल की संरचना हैं, जिसके जरिए पेपर क्लिप जैसी चीजों को दृष्टि से ओझल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है इससे पूर्व भी वैज्ञानिक ऐसे आवरण को विकसित करने में सफल हो चुके हैं, जिसके जरिए केवल माइक्रास्पेस से देखे जा सकने वाली चीजों को अदृश्य किया जा सकता था, लेकिन विकसित नए आवरण से अब पहले से 1000 गुना बड़ी वस्तु को भी अदृश्य किया जा सकेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिघम, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन और टेक्नीकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क के भौतिक विज्ञानियों ने बताया कि शोध के बाद उन्होंने पाया कि नेचुरल क्रिस्टल के प्रयोग से किसी भी बड़े आकार वाली वस्तु को आसानी से अदृश्य किया जा सकता है।
यूनिवर्सिटीज स्कूल ऑफ फिजिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी के डा. शुआंग जेंग के नेतृत्व में संचालित दल ने बताया कि कैल्शियम कार्बोनेट के दो तिकोने टुकड़े साथ में चिपका कर आईने के सामने रख कर इस कारनामे को देखा जा सकता है। रिपोर्ट कहती है कि कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल में तेज प्रकाश के प्रवेश होते ही तुरंत दो भिन्न तरंगों वाली किरणें भिन्न-भिन्न गति और दिशा में वस्तु के आस पास घूमने लगती हैं, जिससे आवरण तो दिखाई देता है लेकिन उसके नीचे रखी चीजे छिप जाती हैं अथवा अदृश्य हो जाती हैं।


Thursday, February 3, 2011

दूर से ही बम को सूंघ लेगा एअर लेजर तकनीक


वैज्ञानिकों ने एक नई लेजर सेंसिंग तकनीक विकसित करने में सफलता पाई है जिससे अब विस्फोटकों की पहचान दूर से ही की जा सकेगी। इस नई लेजर सेंसिंग तकनीक से छिपा कर रखे गए विस्फोटकों की तलाश जान को जोखिम में डाले बिना ही की जा सकेगी। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल और एअरोस्पेस इंजनियरिंग के प्रो.रिचर्ड माइल्स ने बताया कि इस नई तकनीक की मदद से हवा में ही एक लेजर स्पंदन भेजा व वापस पाया जा सकेगा। लेजर के किरण पुंज विस्फोटकों के अणुओं से प्रतिक्रिया करते हैं और उनके फिंगर प्रिंट ले लेते हैं। इससे छिपे विस्फोटकों की खोज सरलता से हो सकेगी। जर्नल साइंस रिपोर्ट के मुताबिक यह नई एअर लेजर तकनीक पुराने रिमोट मेजरमेंट आधारित तकनीक से अधिक ताकतवर औजार साबित होगी। प्रो. माइल्स प्रिंसटन और टैक्सास यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित इस शोध के शीर्ष शोधकर्ता थे।



Sunday, January 30, 2011

वनमानुष से 97 समान हैं हम


वनमानुषों और मानवों के डीएनए चिंपाजी के डीएनए से अधिक समान हैं

जंगलों में अब केवल 50 हजार बार्नियन प्रजाति के वनमानुष शेष बचे हैं
वैज्ञानिकों की पूर्व सोच से कहीं अधिक समानता है मानव और वनमानुष में, इस बात का खुलासा नई रिसर्च में हुआ है। वनमानुष का पहला ब्लूप्रिंट लिया गया जिसके जेनेटिक कोड से पता चला है कि मनुष्यों और वनमानुषों (औरंगउटान) के डीएनए 97
त्
समान हैं। जबकि लाल बालों वाले वानर चिंपाजी से बहुत अधिक समानता रखते हैं, इनमें 99 प्रतिशत समान डीएनए पाए गए हैं। इस स्टडी ने पहली बार वनमानुषों और मानवों के जेनेटिक कोड को तलाशने में सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उनकी इस खोज से कई प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। वर्तमान में 50 हजार बार्नियन और 7 हजार सुमत्रन नामक वनमानुष जंगलों में शेष बचे हुए हैं। जंगलों के खत्म होने के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। वैज्ञानिकों ने सुजी नाम की सुमत्रन प्रजाति के वनमानुष के डीनए को अन्य 5 सुमत्रन और 5 ही बार्नियन प्रजाति के वनमानुषों के डीएनए से मेल कराया। उन्होंने पाया कि 1 करोड़ 30 लाख डीएनए वानरों से मेल खाते हैं। कुछ जानवरों में से वनमानुष ही ऐसे हैं जिन्होंने मिरर टेस्ट पास किया है। शोध का सुझाव है कि जैसे मनुष्यों में विभिन्नताएं पाई जाती हैं उसी तरह अलग-अलग वनमानुषों में अलग-अलग ही योग्यताएं होती हैं। वनमानुषों में एक गुण ऐसा पाया गया है कि वह संकेतों की भाषा द्वारा मानवों तक अपनी बात पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। चिंपाजी और मानवों में 5 से 7 लाख वर्षों से समानता देखी जा रही है। लेकिन नई रिसर्च ने इस बात को साबित कर दिया है कि वनमानुषों (औरंगउटान) के डीएनए चिंपाजी से अधिक मानवों के डीएनए जैसे हैं।