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Sunday, December 26, 2010

अब प्रिंट करें और लें मनपसंद भोजन का स्वाद

असली भोजन का 3डी प्रिंट निकाल सकता है 3डी फूड प्रिंटर
क्या आप बर्गर खाना चाहते हैं? या आपको पिज्जा ज्यादा पसंद है? कोई समस्या नहीं है बस आपको एक बटन क्लिक करना होगा और 3डी फूड प्रिंटर आपके सामने हर वो चीज बना देगा जो आप चाहते हैं! न्यूयॉर्क में कॉरनेल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा 3डी प्रिंटर विकसित किया है जो व्यावसायिक रूप से भी व्यवहार्य साबित होगा। प्रिंटर की खास बात यह है कि इसमें इंक के रूप में कच्ची खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है जिसे प्रिंटर में डालने के बाद आपको बस एक बार रेसिपी भरने की जरूरत होती है। इसके बाद बस बटन दबाओ और मिनटों में बाहर होगा आपका मनपसंद भोजन। जो सामग्री जहां होनी चाहिए, इलेक्ट्रॉनिक ब्लूप्रिंट में बिल्कुल वैसी ही रहती है और पारंपरिक कैड (कंप्यूटर एडेड डिजाइन) सॉफ्टवेयर इसको दिखने में बिल्कुल वैसा ही रखता है जैसा भोजन होना चाहिए। डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. जैफरी लान लिप्टन ने बताया कि फूड प्रिंटर के जरिए आप भोजन का स्वाद, बनावट और अन्य गुणों को सुधार भी सकते हैं। जैसे, यदि आपको बिस्कुट बेहद पसंद है मगर आप उसमें अतिरिक्त कुरकुरापन चाहते हैं। आपको सिर्फ प्रिंटर का स्लाइडर, रेसिपी और निर्देश अपने अनुसार व्यवस्थित करने होंगे। यानी कुछ भी जो सिरिंज में भरा जा सकता हो, जैसे- तरल मक्खन, चॉकलेट, क्रीम, प्रिंट होकर बाहर आ जाएगी! अभी तक शोधकर्ताओं ने फूड प्रिंटर के जरिए कुकिज, केक और टर्की के मांस से बने भोजन का प्रिंट निकालने में सफलता पाई है। शिकागो के एक होटल के शेफ होमारो कैनतू ने इसके जरिए सुशी (जापानी भोजन) को प्रिंट किया। उन्होंने कहा कि आप 3डी प्रिंटर से ऐसे घर के बने एप्पल पाई की कल्पना कर सकते हैं जिसके लिए न तो सेबों को उगाने, जमीन उर्वर करने, माल ढुलाई करने, सुरक्षित रखने, पैकेजिंग करने या पकाने और सजाने तक की जरूरत नहीं पड़ती है। बस आपको भोजन की सभी सामग्री कच्चे माल के रूप में होनी चाहिएं। फिर जैसे कार, ट्रक या कूलरों आदि को जोड़ा जाता है वैसे ही भोजन का 3डी प्रिंट भी तैयार होगा। कैनतू ने कहा कि 3डी प्रिंटिंग भोजन के लिए बिल्कुल वैसा ही काम करेगी जैसा संचार के लिए ई-मेल और इंस्टेट मैसेजिंग काम करते हैं।

पहले ही पता चल जाएंगे पानी के तेवर

जलाशयों की स्थिति से हरदम परिचित रहेगा बिजली कंपनी प्रबंधन
सुंदरनगर सतलुज या ब्यास नदियों का जल अब डराएगा नहीं बल्कि ऐसा तंत्र विकसित हो रहा है जिससे पानी सूचना देगा कि उसके तेवर कब कैसे और कितने खतरनाक होंगे। कमर कसी है भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) व हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड ने। पानी का खौफ इस क्षेत्र को इतना डराता है कि भारत दौरे पर आए चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने जो सात समझौते किए हैं उनमें एक भारत को सतलुज बेसिन में पानी की जानकारी देने का भी है। चीन कितना वादा निभाता है, यह अलग बात है, लेकिन सतलुज ब्यास बेसिन के ब्यास-सतलुज बेसिन पर बने पावर प्रोजेक्टों के आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों की लागत से सभी बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं में जल सूचना प्रणाली (एचआइएस) विकसित की जाएगी। इससे जल विद्युत परियोजनाओं के जलाशयों के परिचालन व प्रबंधन में शीर्ष प्रबंधन को सही समय पर दीर्घावधि तथा अल्पावधि निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। इस तंत्र से विकसित होने वाली प्रणाली को रियल टाइम डिसीजन सपोर्ट सिस्टम कहा गया है। यह निर्णय जलाशयों के बहाव तथा पावर हाउस में टरबाइन चलाने की समय सारिणी, स्पिलवे गेट्स के परिचालन तथा बाढ़ की चेतावनी में कारगर सिद्ध होंगे। जल सूचना प्रणाली के तहत बड़ी परियोजनाओं में इलेक्ट्रोनिक सेंसर व डाटा स्टेशन स्थापित होंगे। इससे जलाशय स्तर, बरसात व पानी की गुणवत्ता की जानकारी रेडियो या फिर सैटेलाइट के माध्यम से एक से दूसरे स्टेशन को भेजी जाएगी। जल स्त्रोतों की योजना व प्रबंधन करने वाले सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के सभी उपभोक्ताओं को जल संबंधी निवेश में कम लागत में बेहतर उत्पादन मिल सके इसके लिए जल सूचना प्रणाली का खाका तैयार किया गया है। इस प्रणाली को नवीनतम डाटा लेकर विकसित करने की योजना है। इसके तहत सही डाटा लेना, बर्फ के पिघलने और बहाव के पूर्वानुमान की प्रणाली में सुधार किया जाएगा। जाहिर है, इससे बांधों के रखरखाव, बिजली उत्पादन और जल वितरण में भी सुधार होगा। मौसम पर नजर रखने के लिए लिए भी स्टेशन बनेगा। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष एबी अग्रवाल कहते हैं कि ब्यास सतलुज संपर्क योजना में भी जल सूचना प्रणाली विकसित हो रही है। प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड के मुख्य अभियंता (उत्पादन) पीसी नेगी कहते हैं कि राज्य विद्युत परिषद के अधीन चलने वाली लारजी पावर प्रोजेक्ट के साथ दूसरी बड़ी योजनाओं में जल सूचना प्रणाली के आधुनिकीकरण का खाका तैयार किया जा रहा है।